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दिल्‍ली-NCR में प्रदूषण से ‘लॉकडाउन’, एक्‍सपर्ट्स ने कहा- दिसंबर तक बाहर कम निकलें

नई दिल्‍ली
राजधानी की हवा अब ‘बहुत खराब’ हो चली है। हाल के दिनों में PM2.5 कणों की मात्रा तेजी से बढ़ी है जिसके चलते स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी शिकायतें होने की संभावना है। एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, लोगों को कम से कम दिसंबर के आखिरी सप्‍ताह तक बाहर निकलने से बचना चाहिए। ऐसा करना सेहत से समझौता करना होगा। उन्‍होंने कहा कि ऐसी खराब हवा में बहुत ज्यादा बाहर रहने पर फेफड़ों, सांस से जुड़ी बीमारियां गिरफ्त में ले सकती हैं। दिल्‍ली की हवा कितनी खराब है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि शुक्रवार सुबह दिल्‍ली का AQI 342 था जबकि मुंबई का सिर्फ 67। देश के दो महानगरों में हवा की क्‍वालिटी में इतना अंतर साफ बताता है कि दिल्‍ली में वायु प्रदूषण से हालात बेहद भयावह हो सकते हैं
सफर के पूर्वानुमान के अनुसार शुक्रवार को भी सुधार की कोई संभावना नहीं है। हवाओं की गति काफी धीमी है, जिसकी वजह से प्रदूषण के लेवल में शुक्रवार तक भी कोई राहत नहीं मिलेगी। 17 अक्टूबर को मामूली राहत मिलने की संभावना जरूर है, लेकिन यह खराब से बेहद खराब श्रेणी में ही बना रहेगा। हरियाणा, पंजाब और आसपास के जिलों में पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सफर के अनुसार 14 अक्टूबर को 740 जगहों पर पराली जलाई गई है। यह इस सीजन का सर्वाधिक होने के साथ पिछले दो सालों के इस मुकाबले की तुलना में दोगुना है। हालांकि सफर का दावा है कि हवाओं की वजह से पराली राजधानी के प्रदूषण को अब भी 6 प्रतिशत प्रभावित कर रही है। आने वाले समय में यह बढ़ सकता है
राजधानी में बढ़ रहे प्रदूषण स्तर को देखते हुए केंद्र सरकार भी एक्टिव हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में निरीक्षण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की 50 टीम तैनात की जाएंगी। उन्‍होंने कहा, ‘दिल्ली में खराब वातावरण में पराली जलने की हिस्सेदारी सिर्फ 4% है। बाकी धूल, निर्माण और जलने जैसे स्थानीय कारणों की वजह से प्रदूषण होता है। दिल्ली में सर्दी के दिनों में प्रदूषण की स्थिति हमेशा गंभीर होती है। पंजाब में पिछले साल से ज्यादा पराली जल रही है। केंद्र सरकार ने इतनी अधिक मशीन दी है। पंजाब सरकार को ध्यान चाहिए कि वहां पराली ज्यादा नहीं जले।’
सफर एजेंसी ने लोगों को सलाह दी है कि वह सुबह और शाम की सैर बंद कर दें। न सिर्फ संवेदनशील लोग, बल्कि सामान्य लोगों के लिए भी सुबह-शाम बाहर निकलना नुकसानदेह हो सकता है।
अगर घर में खिड़कियां हैं, तो उन्हें भी बंद करके रखें। उनके खुले रहने पर गंदी हवा अंदर आ जाएगी और आपके घर की हवा को अधिक प्रदूषित कर देगी। दोपहर के समय धूप आने पर थोड़ी देर के लिए खिड़कियां जरूर खोलें।
दिन के किसी भी समय अधिक देर तक बाहर रहने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी है, तो एन-95 या पी-100 मास्क का ही इस्तेमाल करें। प्रदूषण से बचाने में यही मास्क असरदार है।
अगर आपको अस्थमा है, तो अपनी दवाइयां हर समय पास रखें। एक्सपर्ट के अनुसार, अगर सांस लेने में किसी भी तरह की असुविधा हो रही है, तो तुरंत आराम से लेट जाएं और डॉक्टर की सलाह लें।
एक्सरसाइज करना बंद कर दें। दोपहर के समय भी जॉगिंग की बजाय वॉक करें। इससे प्रदूषक तत्व सांसों के साथ शरीर के अंदर नहीं जाएंगे। वॉक करते हुए भी बीच-बीच में ब्रेक लें।
घरों में लकड़ी, मोमबत्ती और अगरबत्ती न जलाएं। इससे आप इंडोर प्रदूषण के शिकार हो सकते हैं।
घर की साफ-सफाई का तरीका भी बदलें। धूल ना उड़े, इसके लिए झाड़ू लगाने की बजाए घर को गीले पोछे से साफ करें।

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