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मेट्रो का एक महीनाः सोशल डिस्टेंसिंग जीरो, मास्क के बिना भी बेधड़क सफर

14 Oct (NITINKUMAR) नई दिल्ली, कोरोना के चलते करीब साढ़े 5 महीने तक बंद रही मेट्रो का सभी लाइनों पर पहले की तरह सामान्य टाइमिंग के अनुसार ऑपरेशन शुरू हुए एक महीना हो गया। इस दौरान मेट्रो में यात्रियों की तादाद में जैसे-जैसे इजाफा होता जा रहा है, वैसे-वैसे ही कोरोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए बनाए गए नियमों को लेकर लोगों की लापरवाही भी बढ़ती जा रही है। कुछ लोग तो मेट्रो में सफर करते हुए कुछ न कुछ खाते-पीते भी नजर आ रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग तो अब केवल कहने भर के लिए रह गई है, वहीं मास्क लगाने को लेकर भी लोग काफी लापरवाह नजर आ रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा चिंता में वे लोग हैं, जो कोरोना के खतरे से बचने के लिए काफी सतर्कता बरत रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए नियमों की अवहेलना करने वाले लोग बड़ा रिस्क पैदा कर रहे हैं।डीएमआरसी को रोज बड़ी तादाद में इस संबंध में शिकायत मिल रही हैं, लेकिन एनफोर्समेंट के नाम पर मेट्रो की फ्लाइंट स्क्वॉड की टीमें केवल 100-200 चालान ही काट पा रही हैं। उसी का फायदा उठाकर लोग अब नियमों की जमकर अनदेखी करते हुए मेट्रो में पहले की तरह यात्रा करने लगे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं होने से नाराज अन्य लोग सोशल मीडिया पर डीएमआरसी और सीआईएसएफ के रवैये पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।ऐसे ही एक यात्री नीरज ने बताया कि मेट्रो में अब कोई भी रूल फॉलो नहीं कर रहा है और ना ही कोई चेक करने आ रहा है। कश्मीरी गेट, राजीव चौक जैस इंटरचेंज स्टेशनों पर तो आलम यह है कि सुबह-शाम प्लैटफॉर्म पर पैर रखने की जगह भी नहीं बच रही है। हर जगह लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े नजर आ रहे हैं। ट्रेनों के अंदर भी लोग स्टीकर लगी सीटें नहीं छोड़ रहे। नीरज ने डीएमआरसी को सलाह दी है कि वह सुनिश्चित करें कि ट्रेनों के अंदर केवल उतने ही यात्री प्रवेश कर पाएं, जितनी सीटों पर बैठने की अनुमति दी गई है।एक और बड़ी दिक्कत यह भी देखने में आ रही है कि 6 या 8 कोच की ट्रेन होने के बावजूद लोग केवल बीच के तीन-चार कोच में ही इकट्ठा हो जाते हैं। जिस जगह प्लैटफॉर्म पर आने-जाने के लिए एस्केलेटर्स या लिफ्ट लगी होती हैं, उस जगह के आसपास के कोच हमेशा ज्यादा भरे रहते हैं, क्योंकि लिफ्ट या एस्केलेटर से उतरकर लोग प्लैटफॉर्म पर वहीं खड़े हो जाते हैं। अगर प्लैटफॉर्म पर यात्रियों को अलग-अलग कोच में भेजने करने की व्यवस्था कर दी जाए, तो उससे भी काफी फर्क पड़ सकता है।दीपक गुप्ता नाम के एक यात्री ने मेट्रो में एक और गंभीर समस्या का खुलासा किया।
उन्होंने रूट पर यात्रा पूरी होने के बाद टर्मिनल स्टेशनों पर ट्रेनों को अच्छी तरह सैनिटाइज करने के बाद ही दोबारा सर्विस में उतारने के डीएमआरसी के दावे पर सवाल खड़े कर दिए। उनका दावा है कि जल्दबाजी में मेट्रो का स्टाफ ट्रेन को ठीक तरह से साफ ही नहीं कर रहा है और केवल 10 फीसदी जगह ही ठीक से साफ हो पा रही है। इसके चलते ट्रेन अच्छी तरह सैनिटाइज नहीं हो रहीं हैं। कुछ यात्रियों का यह भी सुझाव था कि डीएमआरसी को पीक आवर्स में भीड़भाड़ वाली लाइनों पर रूट को कुछ छोटा करके केवल ऐसे स्टेशनों के बीच ही ज्यादा ट्रेनें चलानी चाहिए, जहां से लोग ज्यादा ट्रैवल करते हैं।

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